Breaking News -
बाल अधिकार अधिनियम 2011- बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 का शासनादेश स्कूल चलो अभियान- वर्ष 2015 स्कूल चलो अभियान शासनादेश नि:शुल्‍क यूनीफार्म- वर्ष 2015-16 नि:शुल्‍क यूनीफार्म शासनादेश परिषदीय अवकाश- वर्ष 2015 की अवकाश तालिका एवं विद्यालय खुलने की समयसारि‍णी मृतक आश्रित- मृतक आश्रित सेवा नियमावली अध्‍यापक सेवा नियमावली- अध्‍यापक सेवानियमावली 2014 साक्षर भारत मिशन- समन्‍वयक एवं प्रेरक के कार्य एवं दायित्‍व विद्यालय प्रबन्‍ध समिति- विद्यालय प्रबन्‍ध समिति के कार्य एवं दायित्‍व परिषदीय पाठयक्रम- परिषदीय विद्यालयों का मासिक पाठयक्रम प्राइमरी प्रशिक्षु भर्ती - प्रशिक्षु भर्ती शासनादेश जूनियर भर्ती- जूनियर गणित/विज्ञान भर्ती का शासनादेश शिक्षामित्र - शिक्षामित्र समायोजन का शासनादेश प्रसूति/बाल्‍यकाल - प्रसूति एवं बाल्‍यकाल अवकाश सम्‍बन्‍धी शासनादेश अलाभित/दुर्बल प्रवेश सम्‍बन्‍धी - शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्‍तर्गत 25 प्रतिशत एडमिशन सम्‍बन्‍धी शासनादेश पति/पत्नी HRA शासनादेश - राजकीय सेवा में पति/ पत्नी दोनों के कार्यरत होने पर मकान किराया भत्ता आदेश अमान्य विद्यालय सम्बन्धी शासनादेश - अमान्य विद्यालय बंद करने एवं नवीन मान्यता शर्तो सम्बन्धी शासनादेश UPTET 2011 परीक्षा परिणाम - UPTET 2011 परीक्षा परिणाम का Verification करने के लिए

Monday, 14 September 2015

भ्रष्टाचार के मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती - मा० सुप्रीम कोर्ट

  • सुप्रीम कोर्ट ने उप्र परिवहन निगम के कंडक्टर को किया बर्खास्त

Click here to enlarge image
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि ऐसे समय में जब भ्रष्टाचार समूची व्यवस्था को कैंसर की तरह प्रभावित कर रहा है, अदालतों को ऐसे मामलों में सजा देते समय किसी प्रकार की दया नहीं दिखानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में बिना टिकट 25 यात्रियों को ले जाने वाले कंडक्टर को सेवा से बर्खास्त करते हुए यह टिप्पणी की। यह मामला 1992 का है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत की पीठ ने कहा कि इस मामले में दोषी कर्मचारी ने यह सोचा कि जब कैंसर का रोग व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है तो वह इसे बढ़ा सकता है। न्यायालय ने कहा कि इसका कृत्य निंदनीय है और इसके साथ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि श्रम अदालत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोषी कर्मचारी गोपाल शुक्ला को हलकी सजा देकर गंभीर गलती की है। ऐसे मामलों में एक मात्र सजा सेवा से बर्खास्तगी है। शीर्ष अदालत के अनुसार, ऐसा लगता है कि परिवहन निगम को इससे हुए नुकसान से बेखबर उच्च न्यायालय ‘क्षमा करो और दया करो’ की अवधारणा से प्रभावित हो गया। 

No comments:

Post a Comment