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Monday, 10 August 2015

सरकार बताएगी कौन किताब बनाएगी टॉपर -

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय बाजार में उपलब्ध तमाम स्टडी मैटेरियल का करवाएगा अध्ययन
नई दिल्ली। बाजार में ढेरों प्रकाशक, लेखकों, संस्थानों और विद्वानों द्वारा तैयार की गई अध्ययन सामग्री यानी स्टडी मैटेरियल उपलब्ध हैं। इनमें से छात्र किसका अध्ययन करें और किसका नहीं, इसे लेकर स्कूल-कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों तक के छात्र हमेशा से उलझन में रहे हैं। छात्र ही नहीं बल्कि उनके अभिभावक भी इसे लेकर परेशान रहते हैं कि आखिर वे अपने बच्चों को किस प्रकाशक या लेखक की पुस्तक पढ़ाएं, जिससे वे कड़ी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में आगे निकल सकें। सरकार ने भी विद्यार्थियों और माता-पिता की इस उलझन को पहचाना है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय अब इस दिशा में नया कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
इस नए प्रयास के तहत स्कूल शिक्षा विभाग, बाजार में उपलब्ध प्रमुख स्टडी मैटेरियल का अध्ययन करवाएगा और इनमें से सबसे अच्छे अध्ययन सामग्री को पहचान कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को बताएगा कि कौन सी अध्ययन सामग्री उनके लिए सबसे बेहतर हो सकती है। अभी इस तरह की कोशिश स्कूलों में ही शुरू करने की योजना है। यानी स्कूलों में विभिन्न पाठ्यक्रमों के स्टडी मैटेरियल का अध्ययन किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग मैटेरियल के अध्ययन की जिम्मेदारी किसी संस्था या शिक्षा निकाय को दे सकता है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत मंत्रालय यह पहल करने जा रहा है।
इस संबंध में पीएमओ में भी चर्चा हुई है। चर्चा में माना गया है कि बाजार में अभी कॉमर्स, साइंस, आर्ट्स आदि विभिन्न पाठ्यक्रमों को लेकर सैकड़ों निजी, सरकारी प्रकाशक, संस्था और लेखकों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि छात्र कई बार किसी एक प्रकाशक या लेखक के प्रचार या फिर बड़े नाम के चलते उसकी पुस्तक खरीद लेते हैं। मगर ये पुस्तकें कई बार उनको ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा पाती। इसके बाद छात्र दूसरे प्रकाशक या लेखक की किताबें खरीदते हैं और उसका दुबारा नए सिरे से अध्ययन करते हैं। इससे छात्रों की मेहनत, वक्त और पैसा तीनों की बर्बादी होती है। इसलिए, अभिभावकों और छात्रों की इस परेशानी को दूर करने के लिए जल्द ही अच्छे स्टडी मैटेरियल की पहचान के लिए सरकार यह पहल शुरू कर सकती है।

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