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Wednesday, 12 August 2015

शिक्षा विभाग के मुकदमे निपटाने को अब स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल -

मुख्यमंत्री कार्यालय में आज इसे अंतिम रूप देने पर होगी चर्चा
लखनऊ । बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग में बढ़ते मुकदमों के बोझ के निपटारे के लिए स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री कार्यालय में बुधवार को इस संबंध में बैठक होगी। इसमें स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल पर निर्णय लिया जा सकता है। स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल की कवायद बरसों से चली आ रही है। ट्रिब्यूनल गठित होने के बाद बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के काफी हद तक मामलों का निस्तारण इनके माध्यम से ही कराया जाएगा।
प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग का दायरा काफी बड़ा है। इसके चलते आए दिन किसी न किसी मामले को लेकर मुकदमे होते रहते हैं। इसके चलते अफसरों और कर्मचारियों को ज्यादातर समय इन मुकदमों की पैरवी की तैयारियों में ही लगाना पड़ता है। जानकारी के मुताबिक बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा मिलाकर करीब 19,000 मुकदमे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं। इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 10,500 मामले हैं। बेसिक शिक्षा के करीब 7,500 व बाकी उच्च शिक्षा के हैं। ज्यादातर मुकदमे शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों के सेवा संबंधी हैं। इसमें पदोन्नति, वेतन, वेतन बढ़ोतरी, निलंबन, नौकरी में रखे जाने या निकाले जाने संबंधी मामले हैं। सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रबंध समितियों के विवाद, स्कूलों को अनुदान सूची में शामिल करने की मांग को लेकर भी सैकड़ों मुकदमे चल रहे हैं।
राज्य सरकार चाहती है कि स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल का गठन कर दिया जाए, जिससे ज्यादातर मामलों का निस्तारण इसी में हो जाए। केवल बड़े मामलों की पैरवी के लिए ही हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े। मुख्यमंत्री कार्यालय में बुधवार को होने वाली बैठक में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने यहां के लंबित मुकदमों की संख्या में बारे में बताएंगे। बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद इस पर अंतिम निर्णय किया जाएगा।

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