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Monday, 3 August 2015

संस्कृत के 77 कॉलेजों को पहले मिलेगा अनुदान -

लखनऊ। राज्य सरकार भले ही मान्यता प्राप्त 246 संस्कृत कॉलेजों को अनुदान सूची पर लेना चाहती हो, मगर मानक पर मात्र 77 ही खरे उतर रहे हैं। इसलिए पहले चरण में इन कॉलेजों को ही अनुदान सूची पर लेने के लिए मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव रखे जाने की तैयारी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही इनको अनुदान सूची पर लेने संबंधी आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद इनके शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकारी कॉलेजों के बराबर वेतनमान मिलने लगेगा।
यूपी में मान्यता प्राप्त संस्कृत कॉलेजों को अनुदान की कवायद वर्ष 2007 से लेने की चल रही है। तत्कालीन मुलायम सरकार ने संस्कृत कॉलेजों को अनुदान पर लेने का निर्णय किया था, लेकिन सत्ता बदलने के बाद तत्कालीन माया सरकार ने अनुदान के लिए शर्तों में बदलाव कर दिया। इसके चलते निजी क्षेत्र के मान्यता प्राप्त कॉलेजों को अनुदान पर नहीं लिया जा सका। प्रदेश में अखिलेश सरकार के सत्ता में आते ही एक बार फिर निजी संस्कृत कॉलेजों को अनुदान सूची पर लेने की कवायद शुरू हुई। अखिलेश सरकार ने 5 फरवरी 2014 को कैबिनेट की बैठक में 246 संस्कृत कॉलेजों को अनुदान सूची पर लेने का निर्णय किया। इसके लिए कॉलेजों में 100 छात्रों की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए 50 कर दिया।
प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से मंडलवार ऐसे स्कूलों का सत्यापन कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को जो रिपोर्ट दी उसमें सभी मानक को पूरा करते हुए सिर्फ 71 कॉलेजों को ही पाया गया। 153 कॉलेज ऐसे पाए गए जो मानक पूरा नहीं करते तथा 32 कॉलेजों में भारी कमियां पाई गईं। शासन को इसके आधार पर ही प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन 77 कॉलेजों को अंतिम रूप से पहले चरण में अनुदान सूची पर लेने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर कराने की तैयारी है। इसके अलावा अन्य कॉलेजों को कमियां दूर करने का मौका दिया जाएगा और जब यह दूर हो जाएंगी, तो इन्हें अनुदान सूची में लेने के लिए नए सिरे से शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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