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Thursday, 30 July 2015

परिषदीय स्कूलों में लिंग भेद रोकने की कवायद -

  • छात्राओं को बताया जाएगा क्या है गुड टच व बैड टच
लखनऊ। सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक शीतल वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को परिषदीय स्कूलों में दाखिला लेने वाली छात्राओं को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक शिक्षक छात्र और छात्राओं में अंतर नहीं करेंगे। छात्राओं को बताया जाएगा कि ‘गुड टच व बैड टच’ क्या है। वह किन-किन परिस्थितियों में किसी सहायता ले। इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्कूल की दीवारों पर जरूरी जानकारियां जैसे हेल्पलाइन नंबर आदि लिखे जाएंगे।
वर्मा ने कहा है कि छात्राओं का स्कूलों में दाखिला न लेने व लेने के बाद न रुकने के कई कारण हैं। कई बार स्कूल का वातावरण उन्हें असहज बना देता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि पढ़ाई के दौरान क्लास रूम, स्कूल की गतिविधियों, खेलकूद, मिड-डे-मील वितरण व शौचालय का प्रयोग करने तथा शिक्षक के व्यवहार में किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं हो रहा है। बालकों के साथ भी लिंग भेद के मुद्दों पर चर्चा कर उन्हें संवेदनशील व जागरूक बनाया जाए। बेसिक शिक्षा अधिकारी इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देंगे।
उन्होंने कहा कि जिला, ब्लॉक व स्कूल स्तर पर होने वाली सभी बैठकों व कार्यशालाओं में लिंग भेद को समाप्त करने के बारे में चर्चा की जाएगी। बालिका शिक्षा की बाधाओं को चिह्नित कर उन्हें दूर करने के उपाय किए जाएंगे। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) यह घोषणा करे कि उसका स्कूल बालिकाओं के लिए हर स्तर पर सुरक्षित है। छात्राओं से यह भी पूछा जाएगा कि रास्ते में छेड़छाड़ तो नहीं हो रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए स्कूलों के आसपास सुरक्षा के उपाय किए जाएं।

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