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Wednesday, 22 July 2015

मिड-डे मील के अंतर्गत बुधवार को दूध और कोफ्ता-चावल देने के फरमान के खिलाफ मामला कोर्ट में -

  • प्रधानाचार्य परिषद ने की दूध उपलब्ध कराने की मांग
  • दूध वितरण के खिलाफ डाली रिट
  • कंवर्जन कास्ट कम होने से नहीं बन सकेगा कोफ्ता-चावल
शाहजहांपुर। कक्षा आठ तक के छात्र-छात्राओं को मिड-डे मील के अंतर्गत बुधवार को दूध और कोफ्ता-चावल देने के तुगलकी फरमान के खिलाफ मामला कोर्ट में पहुंच गया है। परिषदीय स्कूलों में इसका विरोध करने के साथ ही अब एक स्कूल की प्रधानाचार्य ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी है। इधर, प्रधानाचार्य परिषद ने भी विरोध जताते हुए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने की बात कही है।
मिड-डे मील के तहत सप्ताह में एक दिन प्रत्येेक बच्चे को 200 मिली लीटर दूध और कोफ्ता-चावल देने का फरमान जब से आया है, तब से स्कूलों में हाहाकार मचा है। कारण यह कि इतना दूध आएगा कहां से। शिक्षकों का तर्क है कि दूध की किल्लत के चलते सैकड़ों लीटर दूध नहीं मिल सकेगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि उन्हें बच्चों के हिसाब से शुद्ध और गुणवत्तापरक दूध उपलब्ध करा दिया जाए तो वह बंटवाने को तैयार हैं।
गुरु नानक पाठशाला कन्या हाई स्कूल की प्रधानाचार्य हरमीत कौर ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर छात्र-छात्राओं को दूध बंटवाने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि या तो विभाग अथवा शासन दूध उपलब्ध कराए या फिर इस पर रोक लगाए। दूध वितरण संबंधी प्रमाण पत्र विभाग को देने के आदेश पर गुरु नानक स्कूल की ओर से जवाब दिया गया है कि विद्यालय प्रबंध समिति की अनुमति से इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका योजित की गई है। न्यायालय के आदेश के उपरांत ही दूध वितरण के संबंध में कार्रवाई की जाएगी।
मिलते हैं 3.59 रुपये, खर्च हो रहे हैं दुगुना
मिड-डे मील योजनांतर्गत प्रत्येेक बुधवार को 200-200 मिली लीटर दूध छात्र-छात्राओं को दिए जाने में जो पेंच फंस रहा है, वह दूध की अनुपलब्धता तो है ही साथ ही कन्वर्जन कास्ट भी काफी कम है। यहां बता दें कि प्राथमिक स्कूलों में कन्वर्जन कास्ट प्रति छात्र तीन रुपये 59 पैसे तथा जूनियर में पांच रुपये 38 पैसे प्रति छात्र दी जा रही है। जबकि 200 मिली लीटर दूध ही कम से कम आठ से दस रुपये तक का बैठ रहा है। इसके अलावा दूध के लिए चीनी, कोफ्ता के लिए तेल, बेसन, लौकी, मिर्च-मसाला, गैस आदि अलग से खर्चा करा रहे हैं। अब शासन यह बात समझने को बिल्कुल तैयार नहीं है कि जो कन्वर्जन कास्ट दी जा रही है उसमें इतना सब कुछ कैसे संभव हो सकता है।
शासन दूध उपलब्ध कराए तो बंटवा देंगे
प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. केके शुक्ला का कहना है कि कोई भी शिक्षक या प्रधानाचार्य किसी योजना का विरोध नहीं करना चाहता, लेकिन शासन को व्यवहारिक बात तो करनी चाहिए। जिले में सिंथेटिक दूध या फिर पानी मिला दूध बच्चों को पिलाने से किसी भी दिन अनहोनी हो सकती है। दूध बंटवाने की शासन की जिद से नौकरी पर ही संकट खड़ा हो रहा है। उनका कहना है कि कन्वर्जन कास्ट की चिंता किसी को नहीं है, शिक्षक अपनी जेब से भर सकता है, लेकिन जिस गुणवत्ता वाले दूध की बात शासन कर रहा है, वह प्रत्येक स्कूल-कॉलेज को समय पर उपलब्ध करा दिया जाए।


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