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Friday, 26 June 2015

परिषदीय स्कूलों में परीक्षाएं तो होंगी लेकिन कोई फेल नहीं होगा -

लखनऊ। राज्य सरकार ने परिषदीय स्कूलों और सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में पूर्व की तरह विधिवत परीक्षा कराने का निर्णय किया है। इसके साथ ही साल में दो बार टेस्ट भी लिए जाएंगे। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने इस संबंध में शुक्रवार को शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश के मुताबिक अगस्त व दिसंबर में 10-10 नंबर के दो टेस्ट होंगे। अर्द्धवार्षिक परीक्षा अक्तूबर में 30 अंक और सालाना परीक्षा मार्च में 50 अंक की होगी। इन परीक्षाओं में छात्रों को फेल नहीं किया जाएगा।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने के बाद परिषदीय और सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में विधिवत परीक्षा की व्यवस्था समाप्त करते हुए बजट आवंटन बंद कर दिया गया था। दिखावे के लिए सिर्फ परीक्षाएं कराई जाती थीं। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय को सर्वे में पता चला था कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का स्तर दिनों-दिन गिर रहा है। इसलिए छात्रों का टेस्ट, अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार को शासनादेश जारी कर दिया है। इसके मुताबिक कक्षा 2 से 8 तक की लिखित परीक्षाएं होंगी और कक्षा एक की मौखिक परीक्षा होगी। लिखित परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र व कॉपियां मुफ्त में दी जाएंगी। परिषदीय स्कूलों में परीक्षा के लिए अलग से बजट की व्यवस्था कराई जाएगी। इस पर करीब 37 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान है। लिखित परीक्षा के लिए प्रदेश स्तर पर मॉडल प्रश्नपत्र तैयार कराए जाएंगे और इसके आधार पर जिलों में प्रश्नपत्र तैयार होंगे। कक्षा 5 की वार्षिक परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन न्याय पंचायत संसाधन केंद्रों पर तथा कक्षा 8 की वार्षिक परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर कराया जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर छात्र-छात्राओं का रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया जाएगा।

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