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Wednesday, 24 June 2015

थर्ड जेंडर को भी मुफ्त और अनिवार्य बाल शिक्षा का लाभ

  • डीएम और बीएसए के लिए शासन से आया आदेश
  • योजना के तहत सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी
फर्रुखाबाद। नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग की श्रेणी में आने वाले तृतीय लिंगीय (थर्ड जेंडर) को स्कूल में प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इस अधिनियम के तहत थर्ड जेंडर को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाए जाने का आदेश दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने रिट नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य में पारित आदेश के तहत तृतीय लिंगीय (थर्ड जेंडर) समुदाय को स्कूल में प्रवेश दिलाने की सुविधाएं अनुमन्य किए जाने का आदेश दिया है। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर शासन ने डीएम और बीएसए को भेजे आदेश में कहा है कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1)(ग) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़ा वर्ग को मिलने वाली सभी सुविधाएं थर्ड जेंडर के बच्चों मुहैया कराई जाएं। पिछड़े वर्ग समुदाय में आने वाले तृतीय लिंगीय को नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा के तहत पढ़ने का मौका दिया जाए। अगर कोई तृतीय लिंगीय अशिक्षित है और पढना चाहता है तो उसको शिक्षित करने के लिए स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए।
इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। अधिनियम के तहत जो भी तृतीय लिंगीय स्कूल में प्रवेश दिलाने को आवेदन करता है तो उसका दाखिला अवश्य कराया जाए। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाए।

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