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Sunday, 26 April 2015

बहुमंजिला इमारतों के ऊपरी तलों में फंस गए थे नौनिहाल -

  • स्कूलों को सीखना होगा देखभाल का सबक

लखनऊ : राजधानी में आया भूकंप उन स्कूलों के लिए भी सबक की गुंजाइश छोड़ गया है, जो ऊंची इमारत, चमक-दमक, अंग्रेजी पढ़ाई और खास माहौल के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस तो वसूल रहे हैं, लेकिन आपदा की स्थिति में उनके पास नौनिहालों की देखभाल और सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। शनिवार को भूकंप के दौरान जो अभिभावक भाग कर स्कूल पहुंचे, उनका आधे घंटे का अनुभव दिल दहलाने वाला था। हालांकि इसी बीच केंद्रीय विद्यालय सरीखे कुछ ऐसे स्कूल भी थे, जहां शिक्षकों ने पूरे धैर्य के साथ बच्चों को संभाला और उन्हें डर महसूस नहीं होने दिया। शहर में कई शाखाओं वाले एक नामचीन स्कूल के पास यूं तो कई रिकार्ड और उपलब्धियां हैं, लेकिन इस पूरे माहौल की गहराई शनिवार को तब सामने आ गई, जब स्कूल हिलने लगा। शिक्षकों को संभवत: ऐसी स्थिति के लिए कभी कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया था या कभी कुछ बताया भी गया होगा तो मौके पर शिक्षक वह सबक भूल गए। हालत यह हुई कि उधर डर की वजह से बच्चे रोने लगे तो अव्यवस्था के कारण स्कूल में दाखिल हुए हजारों अभिभावकों में धक्का-मुक्की के बीच बच्चों तक न पहुंच पाने के कारण कई बड़े लोग भी घबराहट में रोने लगे। इसी तरह कई अन्य निजी स्कूलों में भी छोटे बच्चों को ऊपरी मंजिल पर पढ़ाया जा रहा था। सीढ़ियां संकरी थीं और भगदड़ का माहौल था। जिन पर बच्चों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी, वे खुद डर कर भाग रहे थे। ऊपरी मंजिलों पर फंसे बच्चों का कोई पुरसाहाल नहीं था। गनीमत रही कि शनिवार दोपहर पौने बारह बजे लगे झटकों के बाद अगले दस मिनट तक भूकंप नहीं आया, अन्यथा स्कूलों में पहले ही हाथ से निकल चुके हालात के बीच स्थिति और भयावह होती। आधे-अधूरे संसाधनों वाले इन निजी स्कूलों की असलियत से अधिकारी भी वाकिफ हैं। इसीलिए स्कूलों में दो दिन की छुट्टी कर दी गई है।

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