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Friday, 26 September 2014

प्रबंध समिति को कार्यकारी प्राचार्य नियुक्ति का अधिकार

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जागरण इलाहाबाद : प्रदेश के सहायता प्राप्त डिग्री कालेजों में प्रबंध समिति को किसी वरिष्ठ शिक्षक को कार्यकारी प्राचार्य नियुक्त करने का अधिकार है। प्रबंध समिति कालेज में प्राचार्य के रिक्त पद पर यह निर्णय ले सकती है। यह नियुक्ति तीन माह या उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा नियमित प्राचार्य की नियुक्ति तक के लिए की जा सकती है। ऐसे कार्यकारी प्राचार्य को पद का वेतन पाने का भी अधिकार है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पूर्णपीठ ने डॉ. जय प्रकाश नारायण सिंह की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अधिनियम की धारा 16 निरसित हो चुकी है जिसके तहत प्रबंध समिति को प्राचार्य का खाली पद भरने से रोका गया था। इस धारा के समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय के परिनियम के उपबंध लागू होंगे। जिसके तहत प्राचार्य के खाली पद पर प्रबंध समिति को कार्यकारी प्राचार्य की नियुक्ति करने की छूट दी गई है। किंतु वह इस पद पर तदर्थ नियुक्ति नहीं कर सकता। कोर्ट ने दलजीत सिंह केस के फैसले को सही नहीं माना। साथ ही कहा कि परेश यादव केस का फैसला विपक्षीगण की मदद नहीं करता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पी. ग्रोवर केस का अनुसरण करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय की परिनियमावली के तहत प्रबंध समिति को स्थायी नियुक्ति होने तक प्राचार्य के खाली पद पर वरिष्ठ अध्यापक की नियुक्ति करने का अधिकार है। कोर्ट ने संदर्भित विधि प्रश्न निर्णीत करते हुए प्रकरण खण्डपीठ को आदेश देने के लिए वापस कर दिया है।

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