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Monday, 8 September 2014

शौचालयों के रख-रखाव की व्यवस्था असली चुनौती -

साफ-सफाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता बार-बार सामने आती है। जाहिर है, अनेक मंत्रालय- जैसे मानव संसाधन विकास, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, इस मसले पर गंभीर मंथन करते दिखने लगे हैं। उद्योग जगत की सीएसआर मुहिम भी सजग होने लगी है। मोदी अगले साल 15 अगस्त तक देश के सभी सरकारी विद्यालयों में दो शौचालयों के न केवल निर्माण बल्कि संचालन की भी ठीक-ठाक व्यवस्था चाहते हैं। यह काफी कठिन है। ढांचा खड़ा करना तो फिर भी आसान है, लेकिन सही रख-रखाव सबसे बड़ी चुनौती है। कितनी कठिन है यह चुनौती- पेश है इसकी एक बानगी।
वर्ष 2014-15 का नया आंकड़ा
प्राइमरी स्कूल 1,13,627
प्राइमरी में बच्चे 2.61 करोड़
उच्च प्राइमरी स्कूल 45,749
उच्च प्राइमरी में बच्चे 92.15 लाख
शौचालय विहीन स्कूल 3,318
लड़कों के लिए नहीं 2047
लड़कियों के लिए नहीं 1271
स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं 56,810
पीएम के काशी के विद्यालयों का भी बुरा हाल
वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी को क्योटो की तरह विकसित करने की कवायद भले ही की जा रही हो लेकिन यहां के सरकारी स्कूलों की साफ-सफाई और रखरखाव चुनौती है। जिले में संचालित बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में बने शौचालयों की हालत बदतर है। गंदगी से अटे पड़े इन स्कूलों के बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। बेसिक स्कूलों में 60 फीसदी तो माध्यमिक विद्यालयों में करीब 25 फीसदी बच्चे खुले में शौच करने पर मजबूर हैं। जिले में 1013 प्राथमिक और 354 मिडिल स्कूल एवं 137 राजकीय एवं अनुदानित माध्यमिक विद्यालय हैं। शौचालय और मूत्रालय की सुविधा तो हर जगह है लेकिन रख-रखाव और सफाई के अभाव में इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। पीएन राजकीय इंटर कॉलेज, रामनगर में दो हजार से अधिक विद्यार्थी हैं। यहां शौचालय की हालत बदतर है। छात्रों ने बताया उन्हें शौच के लिए या तो घर या फिर गंगा किनारे जाना पड़ता है।

लखनऊ । राजधानी लखनऊ के सरकारी स्कूलों के शौचालयों की स्थिति भी कुछ कम बदतर नहीं है। शहर के दो सबसे अच्छे माने जाने वाले अमीनाबाद इंटर कॉलेज और राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में पुरुष और महिला शौचालय अलग-अलग बने हैं। लेकिन दोनों में साफ-सफाई के अभाव में बच्चे और शिक्षक पास जाने से भी कतराते हैं। दोनों सरकारी स्कूलों में शौचालय महज शोपीस बने हुए हैं। इतना ही नहीं स्कूल में 1200 बच्चे हैं लेकिन शौचालय केवल पांच। ऐसे में थोड़ी ही देर में शौचालय गंदा हो जाता है। राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज की स्थिति भी कमोबेश यही है। यहां 1500 बच्चों पर छह शौचालय हैं। साफ-सफाई और रखरखाव चुनौती है।

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