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Thursday, 25 September 2014

परिषदीय स्कूलों में बंद होगी रटने वाली पढ़ाई

  • रोचक ढंग से शिक्षा देने की कवायद
लखनऊ(ब्यूरो)। राज्य सरकार अब परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलने जा रही है। प्रति घंटा विषयवार बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी। शिक्षक बच्चों को रट्टामार पढ़ाई नहीं कराएंगे। उन्हें रोचक तरीके से शिक्षा दी जाएगी। शिक्षकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां निभानी होंगी। सरकार चाहती है कि परिषदीय स्कूलों का तरीका बदले ताकि अभिभावक बच्चों को यहां भेजने के लिए प्रेरित हों। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। इस पर मंथन चल रहा है। नई व्यवस्था जल्द ही लागू करने की तैयारी है। 
प्रदेश में 1,13,627 प्राइमरी स्कूलों में 2.61 करोड़ तथा 45,749 उच्च प्राइमरी स्कूलों में 92.15 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें शिक्षक बच्चों को रट्टामार कर पढ़वाते हैं। बच्चे चिल्लाने पर अधिक व पढ़ाई पर कम ध्यान देते हैं। अब बच्चों के अंदर रचनात्मक कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षक बच्चों को जो पढ़ाएं वह उन्हें आसानी से याद हो जाए। इसके लिए परिषदीय स्कूलों में बच्चों को प्रति घंटा विषय के आधार पर पढ़ाई कराई जाएगी। हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को अलग-अलग घंटों में पढ़ाया जाएगा। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। शिक्षक बच्चों को एक माह तक लगातार पढ़ाने के बाद मूल्यांकन करेंगे।
बदलेगा स्कूल का समय
परिषदीय स्कूल अभी मौसम के आधार पर खुलते और बंद होते हैं। कुछ जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने हिसाब से भी समय तय करते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक हर मौसम में सुबह 9 से अपराह्न 3 बजे तक स्कूल खोला जाएगा। इससे अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने में आसानी होगी। दोपहर में खाने का झंझट इसलिए नहीं रहेगा क्योंकि मिड-डे-मील दिया जाता है।


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