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Friday, 19 September 2014

निजी स्कूलों को देनी ही होंगी किताबें-वर्दी -

  • आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों का मामले में हाईकोर्ट ने कहा
  • वर्दी पर कम बजट रखने पर सरकार को भी लगाई फटकार
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट कर दिया कि सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से पिछडे़ वर्ग के बच्चों को कॉपी-किताबें और वर्दी देनी ही होगी। अदालत ने निजी स्कूलों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि सरकार की है। इतना ही नहीं अदालत ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को वर्दी के लिए काफी कम फंड का प्रावधान रखने पर भी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष स्कूलों ने तर्क रखा कि सरकार कॉपी-किताबें और वर्दी पर आए खर्च का समय पर भुगतान नहीं करती। इतना ही नहीं सरकार वर्दी के लिए बहुत ही कम पैसे देती है जबकि प्रति बच्चे पर तीन से चार हजार रुपये वर्दी पर खर्च होते हैं। स्कूलों ने हाईकोर्ट से ईडब्ल्यूएस कोटे के छात्रों को कॉपी, किताबें और वर्दी मुहैया करवाने का आदेश वापस लेने की मांग की। इस पर खंडपीठ ने साफ कर दिया कि कॉपी-किताबें और वर्दी स्कूलों को देनी ही पड़ेंगी। इस मुद्दे पर 9 अक्तूबर को विस्तृत आदेश पारित किया जाएगा।
वहीं, दिल्ली सरकार ने बुधवार को हलफनामा दाखिल कर कहा था कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को कॉपी-किताबें और वर्दी मुहैया कराने के लिए निजी स्कूलों को प्रतिमाह 1290 रुपये दिए जाते हैं। राजधानी में निजी स्कूलों में पढ़ रहे ईडब्ल्यूएस श्रेणी के कुल 70 हजार में से 50 हजार से अधिक छात्रों को कॉपी-किताबें नहीं मिली हैं।


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