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Monday, 1 September 2014

स्कूलों के लिए चुनौती बना पीएम मोदी का भाषण

  • यू0पी0 सरकार ने शुरू की तैयारियॉ, जारी किये दिशा निर्देश -
नई दिल्ली। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर नरेंद्र मोदी का भाषण देश के सभी स्कूलों में बच्चों को सुनाए जाने का निर्देश जारी करने के साथ मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यह स्वैच्छिक होगा। लेकिन दूसरी तरफ शिक्षक दिवस को ‘गुरु उत्सव’ के रूप में मनाने का राजनैतिक विरोध भी शुरू हो गया है। मोदी के भाषण को लेकर यूपी, पंजाब, हिमाचल और जम्मू में स्कूलों के सामने कई व्यवस्थागत चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही उनका भाषण सुनने पर संशय बना हुआ है। वाराणसी के डीआईओएस अवध किशोर सिंह और बीएसए सुभाष गुप्ता को अभी लिखित निर्देश का इंतजार है। यहां के अधिकांश स्कूलों में व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
सबसे बड़ी मुसीबत पंजाब के टीचरों की है। यहां गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने दिल्ली के निर्देशों को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि विभाग ने फंड तक नहीं दिया है ऐसे में यह विशेष व्यवस्था कैसे की जाए। हालांकि शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अंजलि भांवरा ने कहा है कि यदि स्कूलों को कोई दिक्कत आ रही है तो सूचित करें लेकिन टीचरों के लिए जमीनी हकीकत यह है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक भूख से बेहाल बच्चों को रोकें कैसे। यूपी में भी बच्चों को इतनी देर तक रोकना चुनौती बताया जा रहा है। पंजाब में धान सीजन के चलते जनरेटर किसानों ने किराए पर ले रखे हैं, ऐसे में यह व्यवस्था मुश्किल होगी। भूखे बच्चों के लिए मिड डे मील के कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं। पीएम का भाषण 5 सितंबर को दोपहर 3 बजे से 4.45 के बीच होगा। इस वक्त यूपी में राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का समय भले ही समाप्त हो जाता है, लेकिन स्कूलों में सुबह की शिफ्ट के बच्चों को पौन घंटे देर तक रोकना कई शहरों में स्कूलों के लिए चुनौती बताई जा रही है।


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