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Friday, 26 September 2014

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब काउंसिलिंग से भरी जाएंगी 87 हजार सीटें

बीएड सीटें भरने के आदेश

कानपुर : सीटें न भर पाने से तंगहाली में पहुंच चुके सूबे के 400 बीएड कालेजों को सुप्रीम कोर्ट से संजीवनी मिल गई है। कोर्ट के फैसले के बाद इन कालेजों की खाली सीटें काउंसिलिंग से भरी जाएंगी। सीटें भरने से कालेजों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।1इस बार काउंसिलिंग पूरी होने पर तमाम कालेजों में बहुत कम सीटें भरी थीं। बतौर बानगी त्रिभुवन हरिहर सिंह कालेज, सुल्तानपुर की 100 सीटों में केवल 5, कालेज आफ प्रोफेशनल एजुकेशन, मेरठ की 200 सीटों में 5 और आदि श्री कालेज, मेरठ की सौ सीटों में 17 ही भर सकीं। कमोवेश ऐसे ही हालात लगभग चार सौ स्ववित्तपोषी कालेजों के हैं। प्रदेश भर में 80 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। निजी कालेजों के लिए शिक्षकों का वेतन व दैनिक खर्च निकालना असंभव हो गया था। इससे तमाम प्रबंधक तालाबंदी की तैयारी में थे। उप्र स्ववित्तपोषी महाविद्यालय एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष ब्रजेश भदौरिया के मुताबिक एसोशिएशन की मांग पर खाली सीटों को भरने के लिए बीएड प्रवेश परीक्षा कराने वाले बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई परंतु न्यायालय ने अनुमति नहीं दी। अंतत: प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसी के तहत सर्वोच्च न्यायालय ने काउंसिलिंग, प्रवेश व परीक्षा का पूरा कार्यक्रम जारी करते हुए खाली सीटें भरने के निर्देश जारी किए हैं। उप्र स्ववित्तपोषी महाविद्यालय एसोशिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के अनुसार मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी।

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