Breaking News -
बाल अधिकार अधिनियम 2011- बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 का शासनादेश स्कूल चलो अभियान- वर्ष 2015 स्कूल चलो अभियान शासनादेश नि:शुल्‍क यूनीफार्म- वर्ष 2015-16 नि:शुल्‍क यूनीफार्म शासनादेश परिषदीय अवकाश- वर्ष 2015 की अवकाश तालिका एवं विद्यालय खुलने की समयसारि‍णी मृतक आश्रित- मृतक आश्रित सेवा नियमावली अध्‍यापक सेवा नियमावली- अध्‍यापक सेवानियमावली 2014 साक्षर भारत मिशन- समन्‍वयक एवं प्रेरक के कार्य एवं दायित्‍व विद्यालय प्रबन्‍ध समिति- विद्यालय प्रबन्‍ध समिति के कार्य एवं दायित्‍व परिषदीय पाठयक्रम- परिषदीय विद्यालयों का मासिक पाठयक्रम प्राइमरी प्रशिक्षु भर्ती - प्रशिक्षु भर्ती शासनादेश जूनियर भर्ती- जूनियर गणित/विज्ञान भर्ती का शासनादेश शिक्षामित्र - शिक्षामित्र समायोजन का शासनादेश प्रसूति/बाल्‍यकाल - प्रसूति एवं बाल्‍यकाल अवकाश सम्‍बन्‍धी शासनादेश अलाभित/दुर्बल प्रवेश सम्‍बन्‍धी - शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्‍तर्गत 25 प्रतिशत एडमिशन सम्‍बन्‍धी शासनादेश पति/पत्नी HRA शासनादेश - राजकीय सेवा में पति/ पत्नी दोनों के कार्यरत होने पर मकान किराया भत्ता आदेश अमान्य विद्यालय सम्बन्धी शासनादेश - अमान्य विद्यालय बंद करने एवं नवीन मान्यता शर्तो सम्बन्धी शासनादेश UPTET 2011 परीक्षा परिणाम - UPTET 2011 परीक्षा परिणाम का Verification करने के लिए

Wednesday, 17 September 2014

400 निजी बीएड कालेज खतरे में -

  • सीटें न भरने से बनी स्थिति शिक्षकों को वेतन के लाले
  • आर्थिक संकट से गिरेगी शिक्षण प्रशिक्षण की गुणवत्ता

प्रदेश के करीब चार सौ निजी बीएड कालेजों पर सीटें न भरने से पैदा हुए आर्थिक संकट के कारण बंदी का खतरा मंडरा रहा है। इन कालेजों में शिक्षण कार्य पर खर्च और छात्रों के शुल्क से आय में भारी अंतर की वजह से यह आर्थिक संकट पैदा हुआ है। इस बार काउंसलिंग के माध्यम से बीएड की सिर्फ 35 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं। खाली सीटों को भरने के सभी रास्ते बंद हैं और मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में निजी कालेज प्रबंधक कालेज बंद करने का मन बना रहे हैं। उस पर शासन ने अगले सत्र से दो साल का बीएड करने की योजना बनाई है जिसके चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बीएड से दूर भागेंगे जिसका विपरीत प्रभाव निजी कालेजों पर पड़ना तय है। निजी कालेज प्रबंधक एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजेश भदौरिया बताते हैं कि छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध 165 कालेजों की कुल 19 हजार सीटों में सात हजार सीटें भरी हैं। मेरठ व आगरा का तो और भी बुरा हाल है। उप्र स्ववित्तपोषी महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी का कहना है कि जल्द रास्ता न निकला तो प्रदेश के तकरीबन 400 कालेजों में ताला पड़ सकता है। शासन से 20 हजार रुपये शुल्क बढ़ाने का आग्रह किया था पर भी ध्यान नहीं दिया गया।



No comments:

Post a Comment