Breaking News -
बाल अधिकार अधिनियम 2011- बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 का शासनादेश स्कूल चलो अभियान- वर्ष 2015 स्कूल चलो अभियान शासनादेश नि:शुल्‍क यूनीफार्म- वर्ष 2015-16 नि:शुल्‍क यूनीफार्म शासनादेश परिषदीय अवकाश- वर्ष 2015 की अवकाश तालिका एवं विद्यालय खुलने की समयसारि‍णी मृतक आश्रित- मृतक आश्रित सेवा नियमावली अध्‍यापक सेवा नियमावली- अध्‍यापक सेवानियमावली 2014 साक्षर भारत मिशन- समन्‍वयक एवं प्रेरक के कार्य एवं दायित्‍व विद्यालय प्रबन्‍ध समिति- विद्यालय प्रबन्‍ध समिति के कार्य एवं दायित्‍व परिषदीय पाठयक्रम- परिषदीय विद्यालयों का मासिक पाठयक्रम प्राइमरी प्रशिक्षु भर्ती - प्रशिक्षु भर्ती शासनादेश जूनियर भर्ती- जूनियर गणित/विज्ञान भर्ती का शासनादेश शिक्षामित्र - शिक्षामित्र समायोजन का शासनादेश प्रसूति/बाल्‍यकाल - प्रसूति एवं बाल्‍यकाल अवकाश सम्‍बन्‍धी शासनादेश अलाभित/दुर्बल प्रवेश सम्‍बन्‍धी - शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्‍तर्गत 25 प्रतिशत एडमिशन सम्‍बन्‍धी शासनादेश पति/पत्नी HRA शासनादेश - राजकीय सेवा में पति/ पत्नी दोनों के कार्यरत होने पर मकान किराया भत्ता आदेश अमान्य विद्यालय सम्बन्धी शासनादेश - अमान्य विद्यालय बंद करने एवं नवीन मान्यता शर्तो सम्बन्धी शासनादेश UPTET 2011 परीक्षा परिणाम - UPTET 2011 परीक्षा परिणाम का Verification करने के लिए

Sunday, 17 August 2014

कन्या प्राथमिक विद्यालय बुढ़नामऊ ब्‍लाक बढ़पुर जनपद -फर्रुखाबाद में आयोजित स्‍वतन्‍त्रता दिवस कार्यक्रम की एक झलक -







1 comment:

  1. गांधी, सुभाष और कलाम को एक साथ देख गुलजार हो गयीं गांव की गलियां
    -‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ पर बिखरी लोक गीत की छटा
    जैसे इतिहास जिंदा हो गया। आजादी के नायक गांधी, सुभाष, भगत सिंह और कलाम, काल और विचारधारा की दीवारें तोड़ कर गांव की गलियों में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। मानो आजादी की लड़ाई का दौर जी उठा हो। शुक्रवार को ग्राम बुढनामऊ में गांव की सड़कों पर यह अद्भुत नजारा देख ग्रामीण दंग रह गये। गांव के कन्या प्राथमिक स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर प्रभात फेरी और झंडारोहण के बाद बच्चों ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ पर जम कर लोक गीतों की छटा बिखेरी। चैकस धमाल के बाद बच्चे मीठी बूंदी खाकर निहाल हो गये।
    ग्रामीण पृष्ठभूमि और आर्थिक व सामाजिक दृष्टि से काफी पिछड़े समाज से आने वालेे इन मासूमों के लिये यह स्वतंत्रता दिवस यादगार हो गया। इनके परिवारों में 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसी तारीखों का कोई खास महत्व नहीं होता। जैसे रोज कुंआ खोदने और पानी पीने की कहावत इनके लिये ही बनी है। लेकिन इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ब्लाक बढ़पुर के ग्राम बुढनामऊ में कुछ अनोखा नजारा था। प्रधानाध्यापक नानक चंद्र के नेतृत्व में हाथों में तिरंगा थामे बच्चों की कतार के आगे लाठी टेकते गांधी जी चल रहे थे। उनके साथ ही सदरी पहने नेहरू जी, एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे से मूंछे ऐंठते भगत सिंह, फौजी वर्दी में सजे सुभाष चंद्र बोस, नीली पगड़ी बांधे राजगुरू और लंबे कुर्ते पर टोपी लगाये मौलाना अबुल कलाम आजाद भी भारत माता की जय पुकार रहे थे। कन्या प्राथमिक विद्यालय की यह प्रभात फेरी गांव की गलियों से गुजरी तो ग्रामीण भी बच्चों की झांकी देख हैरान रह गये। प्रभातफेरी देखने को ग्रामीण, विशेष कर महिलायें दरवाजों और छतों तक पर मौजूद थीं। स्कूल के शिक्षा मित्र रमेश सबसे पीछे पूरी जिम्मेदारी से बच्चों की कतार को दुरुस्त करने में लगे थे।
    दैनिक जागरण के आकर्षक बैनर के साथ प्रभात फेरी घर के सामने से गुजरी तो गांधी बने रोहित की बहन भाई को इस रूप में देख खुशी और अचरज से खिलखिला कर हंस पड़ी, वहीं अन्य ग्रामीण महापुरुषों के भेष में अपने बच्चों किशन, सोमिल, शिवम, ललित और सूरज की छटा देख हैरान रह गये। हाथों में तिरंगे थामे बच्चों की टोली गांव की गलियों में वंदे मातरम और भारत माता के जयकारे लगाते गुजरी तो मानो किताबों से निकल कर इतिहास जिंदा हो गया। वही रोंगटे खड़े कर देने वाला जोश। प्रभात फेरी जिधर से निकलती ग्रामीण भी नारे लगाने लगते।
    प्रभातफेरी के लौट कर स्कूल पहुंचने पर झंडारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद शुरू हुआ बच्चों का कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम। ढोल और चिमटे की धुन पर चांदनी, नंदनी, रजनी और डोली ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ पर लोकगीत प्रस्तुत किया तो स्कूल की रसोइया चंद्रकांती मजीरे पर बच्चों की संगत से खुद न रोक पायी। गांव के प्रधान रामविलास भी बच्चों का हुनर देखकर पसीज गये। उन्होंने स्वतंत्रता के नायक बने बच्चों और लोकगीत प्रस्तुत करने वाली बच्चियों को पुरस्कृत किया। पास ही स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किये गये।
    अशिक्षा और गरीबी से निजात के लिये आजादी की दूसरी लड़ाई का आह्वान
    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानाध्यापक नानक चंद्र ने बच्चों को देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने वाले महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान की कहानियां सुनाईं। उन्होंने कहा कि अभी अशिक्षा, गरीबी, भ्रष्टाचार और सामाजिक भेदभाव जैसी बुराइयों से आजादी के लिये लड़ाई बाकी है। उन्होंने इन महापुरुषों के धैर्य और बलिदान की भावना से प्रेरणा लेकर आजादी की दूसरी लड़ाई लडनी के लिये तैयार रहने का आह्वान किया।

    ReplyDelete