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Friday, 3 January 2014

नहीं मिला इन्साफ, उच्‍चाधिकारियों की उदासीनता के कारण बन्धुआ मजदूर की तरह काम करने को मजबूर प्रदेश के संविदा कर्मचारी-

केबिनेट की बैठक में दिनॉंक  20-08-2013 को प्रस्‍ताव पारित ।
सचिव, वित्त विभाग, उ0प्र0शासन द्वारा दि0 30-08-2013  को शासनादेश पारित।

उ0प्र0शासन में आज भी विभागों में 10-15 वर्षो से कार्यरत संविदाकर्मी बन्धुआ मजदूरों की तरह काम करने को मजबूर है। उ0प्र0शासन द्वारा दि0 20.08.2013 को केबिनेट के बैठक में सर्वसम्मति से संविदा कर्मियों को राज्य कर्मियों की भाति ग्रेड-पे एवं मकान भत्ता दिये जाने का निर्णय लिया गया था। उक्‍त निर्णय के क्रम में श्री अजय अग्रवाल, सचिव, वित्त विभाग उ0प्र0शासन द्वारा समस्त प्रमुख सचिवों को शासनादेश संख्या वे0-आ0-2-562/दस-54 (एम) 2008 टी0सी0 दि0 30 अगस्त 2013 के द्वारा दिशा निर्देश जारी किये जा चुके है, परन्तु आज तक सम्बन्‍िधत विभागों के प्रमुख सचिव द्वारा उक्त शासनादेश के क्रम में कोई भी कार्यवाही न करने के कारण संविदाकर्मियों बन्धुआं मजदूर की तरह काम करने को मजबूर है। बढ़ती महंगाई में संविदाकर्मी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं परिवार का पालन पोषण कैसे करें, शासन के द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उ0प्र0सरकार के द्वारा लिये गये उनके निर्णयों को उनके अधीन उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों के द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। केबिनेट के द्वारा लिये गये निर्णय को रददी की टोकरी में डाल दिया गया है। जहां तक संविदा कर्मियों की बात उनकी बात को कहने वाला कोई नहीं है, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण, जिला पंचायती राज विभाग आदि ऐसे कई अन्य विभाग है, जिनमें हजारों की संख्या में संविदा कर्मियों न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे है, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं को सफल करने में संविदाकर्मियों का बहुत ही अहम योगदान हो रहा है। सम्‍बन्धित अधिकारियों के द्वारा आये दिन संविदाकर्मी का शोषण किया जाता है, जिससे यह कर्मचारी मानसिक रूप से प्रताणित हो रहे है एवं मानसिक वेदनाओं को झेलने के लिए मजबूर है। केबिनेट के निर्णय से संविदाकर्मियो को बहुत बड़ी राहत महसूस कर रहे थे, परन्तु उच्चाधिकारियों के द्वारा सरकार की छबि धूमिल की जा रही है। जिसमें संविदाकर्मियों में आक्रोश है। कब मिलेगा इन्साफ, इसी उम्मीद के साथ समस्त संविदाकर्मियों आस लगाये बैठे है।(निवेदक-समस्त संविदाकर्मी)     

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